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Bihar Dial 112: बिहार की डायल-112 सेवा होगी हाईटेक, बॉडी कैमरा और AI से बढ़ेगी निगरानी

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Alam Ki Khabar: Bihar News के तहत बिहार की डायल-112 सेवा में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। पुलिस वाहनों में डैश कैमरे, जवानों को बॉडी कैमरे और AI आधारित मॉनिटरिंग से पारदर्शिता व जवाबदेही बढ़ाने की तैयारी है।

पटना, 5 अगस्त। आलम की खबर: बिहार में आपातकालीन पुलिस सेवा डायल-112 को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में पुलिस मुख्यालय ने नई पहल शुरू कर दी है। ड्यूटी के दौरान लापरवाही और शिकायतों पर अंकुश लगाने के लिए अब डायल-112 के वाहनों में डैश कैमरे तथा ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की वर्दी पर बॉडी-वॉर्न कैमरे लगाने की तैयारी की जा रही है।

पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में एक विस्तृत प्रस्ताव पुलिस महानिदेशक विनय कुमार को भेजा है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद कंट्रोल सेंटर से ही डायल-112 की प्रत्येक गाड़ी की लोकेशन, पुलिसकर्मियों की गतिविधियां और मौके पर की गई कार्रवाई की निगरानी की जा सकेगी। इससे यह भी दर्ज होगा कि सूचना मिलने के बाद पुलिस कितने समय में घटनास्थल पर पहुंची और वहां उसकी कार्यवाही कैसी रही।

नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल निगरानी बढ़ाना नहीं बल्कि पुलिसिंग को अधिक जवाबदेह और भरोसेमंद बनाना भी है। अधिकारियों का मानना है कि कैमरों के इस्तेमाल से ड्यूटी के दौरान अनुशासन मजबूत होगा और नागरिकों की शिकायतों के निष्पक्ष निस्तारण में भी मदद मिलेगी।

पुलिस विभाग अब अपराध नियंत्रण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी सहारा लेने की तैयारी कर रहा है। डायल-112 पर आने वाली शिकायतों का AI के माध्यम से विश्लेषण किया जाएगा। इससे यह पता लगाया जाएगा कि किस थाना क्षेत्र में किस प्रकार की घटनाएं अधिक हो रही हैं। इन आंकड़ों के आधार पर संवेदनशील इलाकों की पहचान कर अतिरिक्त गश्त, पुलिस बल की तैनाती और अपराध रोकने की रणनीति तैयार की जाएगी।

डायल-112 नेटवर्क का विस्तार भी किया जाएगा। इसे राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, रेलवे, परिवहन विभाग, निजी एंबुलेंस सेवाओं, ट्रॉमा सेंटर तथा स्मार्ट सिटी के इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से जोड़ने की योजना है। स्मार्ट सिटी के इमरजेंसी कॉल बॉक्स भी इसी नेटवर्क से लिंक किए जाएंगे ताकि किसी भी आपात स्थिति में संबंधित एजेंसियां तेजी से कार्रवाई कर सकें।

पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार डायल-112 के माध्यम से प्रतिदिन औसतन 7,500 लोगों को आपातकालीन सहायता मिल रही है। सेवा का औसत रिस्पांस टाइम लगभग 10 मिनट है। पिछले चार वर्षों में 60 लाख से अधिक लोगों को पुलिस, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस, हाईवे पेट्रोलिंग तथा महिला एवं बाल सहायता जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।

रिकॉर्ड बताते हैं कि डायल-112 पर सबसे अधिक शिकायतें स्थानीय विवाद और मारपीट से संबंधित आती हैं। इसके अलावा घरेलू हिंसा, सड़क दुर्घटनाओं और आग लगने की घटनाओं में भी इस सेवा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। नई तकनीक लागू होने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ने, जवाबदेही मजबूत होने और आम लोगों को पहले से बेहतर व तेज सहायता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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नई व्यवस्था से साफ है कि बिहार पुलिस अब केवल घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि तकनीक और डेटा विश्लेषण के जरिए अपराध होने से पहले ही उसे रोकने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो डायल-112 सेवा आम लोगों के लिए और अधिक भरोसेमंद तथा आधुनिक आपातकालीन सहायता प्रणाली बन सकती है।

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